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मंगलवार, 14 जून 2022

प्रसव आसानी से होने का यन्त्र

 प्रसव आसानी से होने का यन्त्र 

मन्त्र - अस्ति गोदावरी तीरे जम्भला नाम राक्षसी। 

तस्याहः स्मरणमात्रेण विशल्या गर्भिणी भवेत्।।

विधि - प्रसव वेदना से गर्भिणी बहुत परेशान हो तो वट (बरगद) के पत्ते पर ऊपर लिखा यन्त्र तथा मन्त्र लिखकर उसके (गर्भिणी) के मस्तक पर रखने से सुखपूर्वक प्रसव हो जाता है। 

 

रविवार, 12 जून 2022

गर्भ स्थिर रहने का यन्त्र

 गर्भ स्थिर रहने का यन्त्र 

विधि - इस यन्त्र को कपूर , केसर , कस्तूरी , गोरोचन , अगर , सुगन्ध , माला आदि से भोजपत्र पर रविवार या मंगलवार को लिखकर स्त्री की भुजा अथवा गले में बाँध दे तो गर्भ स्तम्भन हो अर्थात् गर्भ स्थिर रहे।  परीक्षित है। 



बुधवार, 8 जून 2022

गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र - 5

 गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र 

जिस स्त्री के गर्भ की स्थापना न होती हो , उसको निम्न यंत्र अवश्य धारण करना चाहिए।  यह यंत्र 1100 बार लिखने से ही सिद्ध हो जाता है।  किसी पर्वकाल में भोजपत्र पर अनार की कलम से सफेद चन्दन , रक्त चंदन , कपूर , केसर , कस्तूरी पीसकर , स्याही बनाकर , मंत्र -जप से 108 आहुतियां देकर हवन करें। 

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लों गं स्वाहा। 


हवन के धुएं पर यंत्र को धूपित कर , लाल डोरे से बांधकर , तांबे के कवच में भरकर स्त्री की कमर में धारण कराएं।  यदि तांबे के कवच में असुविधा हो तो यंत्र को भोजपत्र पर लिखकर , मोमी कागज में लपेटकर और कपड़े में सिलकर भी धारण किया जा सकता है। 

विशेष : -  यंत्र को उस समय धारण कराया जाता है , जब दो महीने का गर्भ हो। इसे प्रसवकाल तक धारण किया जाना चाहिए तथा प्रसव के बाद यंत्र को खोलकर किसी कुएं या नदी के जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। 


गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र - 4

गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र 

  यदि किसी स्त्री के गर्भ न ठहरता हो और उपचार करा -कराकर वो थक चुकी हो तो उसे निम्न यंत्र का आश्रय लेना चाहिए -

यंत्र को केसर की स्याही तथा पुत्रजीवक की कलम से भोजपत्र पर लिखें ( भोजपत्र के अभाव में कोरे सफेद कागज का प्रयोग भी किया जा सकता है ) ।  धूप -दीप से पूजा करके स्त्री अपनी कटि में यंत्र को धारण कर लें। यंत्र के प्रभाव से उसके गर्भ की अवश्य ही स्थापना होगी। 


गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र - 3

  गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र 

निम्न यंत्र को स्वर्ण पत्र पर अष्टगंधादि से लिखकर 48 दिनों तक नित्य वैदिक रीती से उसकी पूजा करें और प्रस्तुत मंत्र का नित्य एक हजार जप करें -

ओं रहु रहु हो श्वेत वर्ण पुरुष 

रहु रहु हो हरि धवल पुरुष रहु 

रहु हो शंख चक्र गदाधर रहु रहु। 

 


यंत्र को दूध , खीर व शहद का भोग लगाएं तत्पश्चात् उसे गले में धारण करें एवं पति के साथ रमण करें , तो निश्चय ही गर्भ की स्थापना होगी। 


गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र - 2

  गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र 

निम्न यंत्र को दीवाली की रात्रि में भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर , पूर्वोक्त विधि से पूजन करके सिद्ध कर लें तथा ताम्रपत्र के कवच में भरकर , स्त्री की कमर से काले डोरे के द्वारा बंधवा दें। इससे उसके गर्भ की स्थापना हो जाती है। 



गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र - 1

 गर्भस्थापना -संबंधी यंत्र 

यदि किसी स्त्री को गर्भस्त्राव , गर्भपात अथवा बंध्यत्व का कष्ट हो तो रविवार के दिन , जब मूल नक्षत्र आए , तो निम्न यंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर , उस स्त्री के बाएं बाजू पर बांध देने से वो रोगमुक्त हो जाएगी। गर्भस्थापना और गर्भ -सुरक्षा का यह अद्वितीय यंत्र है। 



शनिवार, 4 जून 2022

लाभदायक पंद्रहिया यंत्र

 लाभदायक पंद्रहिया यंत्र 

यंत्र-लेखन के लिए पहले लेखन -सामग्री इकट्ठी करें। लापसी , अनार की लेखनी (कलम), अष्टगंध [सफेद चंदन , रक्त (लाल) चंदन , केसर , कस्तूरी , सिंदूर , गोरोचन , अगर और तगर , आठ वस्तुओं का मिश्रण ] स्याही , चावल , गुग्गल , पुष्प , खोपरे के टुकड़े , नागरबेल के 21 पान , 21 सुपारी , घृत का दीपक और एक कोरा कोरा घड़ा , यंत्र - लेखन और उसके सिद्ध करने की विधि निम्न है -

विधि : किसी पवित्र , शुद्ध व एकांत स्थान में पहले पूर्व दिशा की ओर घड़े की स्थापना करें। उसके सामने भोजपत्र बिछाना चाहिए। उसके ऊपर के भाग में घृत का दीपक हो और नीचे के भाग में धूप का धूपिया हो , जिसमें गुग्गल का धूप करना चाहिए। तत्पश्चात अनार की कलम से भोजपत्र पर अष्टगंध से यंत्र लिखना चाहिए। यंत्र लिखते समय 'ह्रीं ' या 'ॐ ह्रीं श्रीं ' मंत्र का जप करते रहना चाहिए। 

यंत्र लिखने के बाद उसका पूजन करें , चावल , पुष्प , खोपरे का टुकड़ा , पान -सुपारी अनुक्रम से छुआने चाहिए। साथ में धूप भी करते रहना चाहिए। इस प्रकार 21 दिन तक नित्य पूजन करें और नित्य मंत्र का 6 हजार जप करें। 21 दिन में सवा लाख मंत्र का जप पूर्ण हो जाएगा , तथा यंत्र सिद्ध हो जाएगा। अंत में हवन , तर्पण आदि विधिपूर्वक करें , तत्पश्चात यंत्र को चांदी या सोने के कवच में डालकर पुरुष को अपने दाहिने हाथ में और स्त्री को बाएं हाथ में या गले में धारण करना चाहिए। इस यंत्र के धारण करने से सर्व प्रकार के विष का नाश होता है। देवता प्रसन्न होते हैं। बंध्या के गर्भ रहता है। निःसंतान के संतान होती है। पुत्ररत्न होता है। एकांतर ज्वर मिटता है , साधक निरोग रहता है। 

विशेष - यंत्र की रचना शुक्ल पक्ष में उत्तर दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए। मंत्र -जप काल में सफेद माला प्रयुक्त होती है। श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए तथा आसन भी श्वेत होना चाहिए। साधना के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन , सात्त्विक भोजन और शुद्ध विचार रखे जाने चाहिए। 

राज सम्मान प्राप्ति यन्त्र

 राज सम्मान प्राप्ति यन्त्र  विधि - इस यन्त्र को अष्टगंध से तुलसी की लकड़ी की कलम से , पीपल के पत्ते पर लिखकर और स्वर्ण के यन्त्र में भर कर द...